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पटना में आंगनबाड़ी के पास नाले में गिरकर दो साल की बच्ची की दर्दनाक मौत, ग्रामीण और परिजन सुरक्षा व्यवस्था पर उठाते सवाल

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पटना: राजधानी के नौबतपुर थाना क्षेत्र स्थित सरासत गांव में गुरुवार (19 फरवरी, 2026) को एक ढाई साल की बच्ची की नाले में गिरने से मौत हो गई। बच्ची आंगनबाड़ी केंद्र से घर लौट रही थी, तभी वह खुले चैंबर में गिर गई। देर रात नाले से निकाली गई बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी जान बचाना संभव नहीं हो पाया। परिजनों ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे रिया कुमारी, अपने घर से लगभग 100 मीटर दूर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र गई थी। छुट्टी के बाद घर न लौटने पर परिजन तुरंत केंद्र पहुंचे और उसे खोजने लगे, लेकिन बच्ची कहीं नहीं मिली।
जब बच्ची नहीं मिली, तो परिवार ने अपहरण की आशंका जताई और पुलिस को सूचित किया। इसी बीच ग्रामीणों की नजर खुले चैंबर पर गई, जहां बच्ची का थैला और कटोरा पड़ा था। ग्रामीणों ने डंडे की मदद से जांच की और मोटर लगाकर नाले का पानी निकालना शुरू किया। पानी हटाने पर बच्ची कीचड़ में फंसी मिली। उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाया गया, लेकिन वह मृत पाई गई।
नौबतपुर थाना प्रभारी मंजीत ठाकुर ने बताया कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। ग्रामीण और परिजन खुले नालों को ढकने और बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। रिया की माता-पिता ने आंगनबाड़ी सेविका पर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि यदि सेविका बच्ची को घर तक छोड़तीं, तो यह हादसा टाला जा सकता था। रिया अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी।
इस दर्दनाक घटना ने स्थानीय लोगों में आक्रोश और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है। अधिकारियों से आग्रह किया जा रहा है कि खुले नालों और खतरनाक जगहों पर तुरंत सुरक्षा उपाय किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

संपादकीय: बच्चों की सुरक्षा की उपेक्षा दुर्भाग्यपूर्ण

रिया कुमारी की दर्दनाक मौत ने यह स्पष्ट कर दिया कि हमारे ग्रामीण और शहरी इलाकों में बच्चों की सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। खुले नाले, असुरक्षित चैंबर और अनियमित निगरानी ऐसे हादसों के लिए हमेशा खतरा बने रहते हैं। आंगनबाड़ी केंद्र और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाएं, निगरानी बढ़ाएं और खतरनाक जगहों को तुरंत सुरक्षित बनाएं। केवल हादसे के बाद अफसोस जताना पर्याप्त नहीं है, भविष्य में किसी और बच्ची की जान बचाने के लिए ठोस कार्रवाई आवश्यक है।

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